रायपुर : किसानों को धान बेचने के लिए सुगम एवं बेहतर व्यवस्था प्रदान करने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में ‘तुहर टोकन मोबाइल एप’ प्रारंभ किया है। इस एप के माध्यम से किसानों को घर बैठे धान बेचने के लिए टोकन की व्यवस्था उपलब्ध होगी, जिससे समितियों में लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। यह मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस ऐप में किसानों को सर्वप्रथम आधार आधारित ओटीपी के माध्यम से पंजीयन करना होगा। किसान प्रतिदिन सुबह 8 बजे से इस ऐप के माध्यम से टोकन के लिए आवेदन कर सकेंगे। खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीमांत कृषक (2 एकड़ या 2 एकड़ से कम भूमि) को अधिकतम 1 टोकन, लघु कृषक ( 2 से 10 एकड़ तक) को अधिकतम 2 टोकन और दीर्घ कृषक (10 एकड़ से अधिक) को अधिकतम 3 टोकन प्रदान किए जाएंगे।
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सात दिनों के लिए मान्य रहेंगे टोकन
उन्होंने बताया, नया टोकन बनाने के लिए समय-सीमा रविवार से शुक्रवार तक (प्रातः 8.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक) निर्धारित की गई है। जारी टोकन आगामी 07 खरीदी दिवसों के लिए मान्य रहेंगे। धान खरीदी केन्द्र की प्रतिदिन की खरीदी सीमा का 70 प्रतिशत हिस्सा मोबाइल एप के माध्यम से टोकन के लिए आरक्षित रहेगा। इस 70 प्रतिशत में से लघु एवं सीमांत कृषक के लिए 80 प्रतिशत और दीर्घ कृषक के लिए 20 प्रतिशत का आरक्षण किया गया है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी उपार्जन केन्द्र की प्रतिदिन की खरीदी सीमा 1000 क्विंटल है, तो मोबाइल ऐप के लिए आरक्षित 700 क्विंटल में से 560 क्विंटल लघु एवं सीमांत कृषकों के लिए, 140 क्विंटल दीर्घ कृषकों के लिए आरक्षित रहेगा।
सोसायटी स्तर पर कटेगा 30 प्रतिशत टोकन
शेष 30 प्रतिशत टोकन सोसाइटी स्तर पर भी किसानों के लिए उपलब्ध रहेंगे, जिससे सभी वर्ग के किसानों को धान विक्रय के लिए सहज और सुगम व्यवस्था प्राप्त हो सके। खाद्य विभाग द्वारा विकसित ‘तुहर टोकन मोबाइल एप’ राज्य के किसानों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाते हुए खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और समय की बचत सुनिश्चित करेगा।
Alok Kumar Srivastava serves as the Chief Editor of Rashtra Darshan, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering political affairs, social issues, and regional developments.

